होली के विचार शास्त्र और सत भक्ति

होली के विचार शास्त्र और सत भक्ति
हमारे हिंदू धर्म में होली एक त्यौहार है असल में आज जो त्यौहार हम मना रहे हैं उस त्योहार की हमारे हिंदू धर्म के शास्त्रों में कोई प्रमाण नहीं है होली का त्यौहार भगत पहलाद ने बुराई पर अच्छाई की जीत में पहली बार मनाया गया जो एक आज परंपरा बन गया है देखा जाए तो भगत पहलाद की जीत का कारण उनकी सत भक्ति थी जो राम नाम की कमाई से हुई थी और हम राम नाम की कमाई ना करके होली पर एक दूसरे को रंग लगा रहे हैं नाच रहे हैं नशा कर रहे हैं कहने का मतलब यह है कि भगत पहलाद के आदर्शों से कोसों दूर है हमें जो होली पर काम करना चाहिए वह तो कर भी नहीं रहे हैं और अन्य ही काम में लग रहे हैं जो हमारे शास्त्र विरुद्ध साधना करने का प्रमाण है जिस कारण हमारे जीवन में अनेकों कष्ट आते हैं उदाहरण के तौर पर गीता जी अध्याय 16 शिलांग 23 और 24 जरूर देखें


      होली के विचार शास्त्र और सत भक्ति
हमारे शास्त्रों में क्या लिखा है और हम क्या कर रहे हैं हम मनुष्य जीवन बर्बाद कर रहे हैं अगर शास्त्रों में लिखी हुई भक्ति नहीं कर रहे हैं तो मनुष्य जीवन व्यर्थ किया जा रहा है अगर हमें वास्तव में होली का त्यौहार मनाना है तो होली के दिन अन्य आडंबर ओं को छोड़कर हमें केवल राम नाम की होली कहने का मतलब यह है हमें असली राम नाम का जाप करना चाहिए सही माइनों पर जब ही होली संभव होगी
होली के विचार शास्त्र और सत भक्ति  सभी प्रमाणित विचार है संत रामपाल जी महाराज के सत्संग में पूर्ण परमात्मा की भक्ति की जानकारी दी जाती

         
 वेदों में कौन से परमात्मा की महिमा लिखी है कौन है वह परमात्मा जिसका वेद भी जिक्र करते हैं वेद गवाह है कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा है प्रमाण देखते हैं



संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी गई पुस्तक मे शास्त्रो से प्रमाणित ज्ञान है! जिसको पढने से हमे कौन सी साधना करनी चाहीए और हमे पूर्ण मोक्ष का मार्ग का ज्ञान होता है!
आवश्य पढे पुस्तक " ज्ञान गंगा" 




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